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mahabharat 8.49.46: तत्पश्चात् युधिष्ठिर ने कर्ण की दोनों भुजाओं, मस्तक और वक्षस्थल पर चार बाण मारे और हर्ष से गर्जना की।   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  8.49.46 
ततो बाह्वोर्ललाटे च हृदि चैव युधिष्ठिर:।
चतुर्भिस्तोमरै: कर्णं ताडयित्वानदन्मुदा॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् युधिष्ठिर ने कर्ण की दोनों भुजाओं, मस्तक और वक्षस्थल पर चार बाण मारे और हर्ष से गर्जना की।
 
Thereafter Yudhishthira struck Karna on both the arms, forehead and chest with four arrows and roared with joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)