vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 8: कर्ण पर्व
»
अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन
»
श्लोक 46
श्लोक
8.49.46
ततो बाह्वोर्ललाटे च हृदि चैव युधिष्ठिर:।
चतुर्भिस्तोमरै: कर्णं ताडयित्वानदन्मुदा॥ ४६॥
अनुवाद
तत्पश्चात् युधिष्ठिर ने कर्ण की दोनों भुजाओं, मस्तक और वक्षस्थल पर चार बाण मारे और हर्ष से गर्जना की।
Thereafter Yudhishthira struck Karna on both the arms, forehead and chest with four arrows and roared with joy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×