Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.49.41: तत्पश्चात्, पलक झपकते ही कर्ण ने मुड़ी हुई गांठों वाले नब्बे बाण छोड़े और उन तीखे बाणों से उसने युद्धभूमि में राजा युधिष्ठिर के कवच को टुकड़े-टुकड़े कर दिया। | mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात्, पलक झपकते ही कर्ण ने मुड़ी हुई गांठों वाले नब्बे बाण छोड़े और उन तीखे बाणों से उसने युद्धभूमि में राजा युधिष्ठिर के कवच को टुकड़े-टुकड़े कर दिया।
Thereafter, in the blink of an eye Karna aimed ninety arrows having bent knots and with those sharp arrows he pierced the armour of King Yudhishthira to pieces on the battlefield.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥