सात्यकिश्चेकितानश्च युयुत्सु: पाण्ड्य एव च।
धृष्टद्युम्न: शिखण्डी च द्रौपदेया: प्रभद्रका:॥ ३३॥
यमौ च भीमसेनश्च शिशुपालस्य चात्मज:।
कारूषा मत्स्यशेषाश्च केकया: काशिकोसला:॥ ३४॥
एते च त्वरिता वीरा वसुषेणमताडयन्।
अनुवाद
सात्यकि, चेकितान, युयुत्सु, पांड्य, धृष्टद्युम्न, शिखंडी, द्रौपदी के पांचों पुत्र, प्रभद्रक, नकुल-सहदेव, भीमसेन और शिशुपाल के पुत्र तथा करुष, मत्स्य, केकय, काशी और कोसल के योद्धा - इन सभी वीर सैनिकों ने तुरंत वसुषेण (कर्ण) को घायल करना शुरू कर दिया। 33-34 1/2॥
Satyaki, Chekitana, Yuyutsu, Pandya, Dhrishtadyumna, Shikhandi, the five sons of Draupadi, Prabhadraka, Nakul-Sahadeva, Bhimsen and the sons of Shishupal and the warriors of Karusha, Matsya, Kekaya, Kashi and Kosala - all these brave soldiers immediately started wounding Vasushena (Karna). 33-34 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥