श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  8.49.26 
स हेमविकृतं चापं विस्फार्य विजयं महत्।
अवाकिरदमेयात्मा पाण्डवं निशितै: शरै:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
उस वीर ने, जो अत्यन्त आत्मविश्वास से युक्त था, अपना विशाल स्वर्ण धनुष विजय खींचकर पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर को तीखे बाणों से आच्छादित कर दिया।
 
That hero, endowed with immeasurable self-confidence, drew his huge golden bow named Vijaya and covered Pandu's son Yudhishthira with sharp arrows.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas