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mahabharat 8.49.25: फिर, राधा के क्रूर और बहादुर पुत्र कर्ण को थोड़ी देर बाद होश आया और उसने राजा युधिष्ठिर को मारने का फैसला किया।   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  8.49.25 
प्रतिलभ्य तु राधेय: संज्ञां नातिचिरादिव।
दध्रे राजविनाशाय मन: क्रूरपराक्रम:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
फिर, राधा के क्रूर और बहादुर पुत्र कर्ण को थोड़ी देर बाद होश आया और उसने राजा युधिष्ठिर को मारने का फैसला किया।
 
Then, the cruel and brave son of Radha, Karna, regained his senses after a short while and decided to kill King Yudhishthira.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)