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mahabharat 8.49.24: महाराज! राजा का पराक्रम देखकर पाण्डव सैनिक गर्जना, हर्ष, चहचहाहट और खिलखिलाहट करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  8.49.24 
सिंहनादश्च संजज्ञे क्ष्वेला: किलकिलास्तथा।
पाण्डवानां महाराज दृष्ट्वा राज्ञ: पराक्रमम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! राजा का पराक्रम देखकर पाण्डव सैनिक गर्जना, हर्ष, चहचहाहट और खिलखिलाहट करने लगे।
 
Maharaj! Seeing the might of the King, the Pandava soldiers started roaring, rejoicing, chirping and giggling.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)