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mahabharat 8.49.22: वह शल्य के सामने ऐसे अचेत होकर गिर पड़ा मानो मर गया हो। राजा युधिष्ठिर ने अर्जुन के कारण कर्ण पर पुनः आक्रमण नहीं किया।   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  8.49.22 
गतासुरिव निश्चेता: शल्यस्याभिमुखोऽपतत्।
राजापि भूयो नाजघ्ने कर्णं पार्थहितेप्सया॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वह शल्य के सामने ऐसे अचेत होकर गिर पड़ा मानो मर गया हो। राजा युधिष्ठिर ने अर्जुन के कारण कर्ण पर पुनः आक्रमण नहीं किया।
 
He fell unconscious in front of Shalya as if he had died. King Yudhishthira, for Arjuna's sake, did not attack Karna again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)