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mahabharat 8.49.19: तत्पश्चात् राजा युधिष्ठिर ने सूतपुत्र को मारने की इच्छा से तुरन्त ही अपना धनुष खींचकर उस पर यमदण्ड के समान बाण छोड़ा॥19॥   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  8.49.19 
तत: पूर्णायतोत्कृष्टं यमदण्डनिभं शरम्।
मुमोच त्वरितो राजा सूतपुत्रजिघांसया॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा युधिष्ठिर ने सूतपुत्र को मारने की इच्छा से तुरन्त ही अपना धनुष खींचकर उस पर यमदण्ड के समान बाण छोड़ा॥19॥
 
After that, King Yudhishthir, wishing to kill Sutaputra, immediately drew his bow completely and released an arrow like Yamadanda at him. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)