Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.49.18: तत्पश्चात् उन्होंने अपना विशाल स्वर्ण-जटित धनुष उठाया और उस पर एक तीक्ष्ण बाण चढ़ाया, जो पर्वतों को भी भेदने में समर्थ था।   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  8.49.18 
ततो विस्फार्य सुमहच्चापं हेमपरिष्कृतम्।
समाधत्त शितं बाणं गिरीणामपि दारणम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने अपना विशाल स्वर्ण-जटित धनुष उठाया और उस पर एक तीक्ष्ण बाण चढ़ाया, जो पर्वतों को भी भेदने में समर्थ था।
 
Thereafter, he stretched out his huge bow adorned with gold and strung on it a sharp arrow capable of piercing even the mountains.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)