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mahabharat 8.49.16: हे महाराज! सारथीपुत्र के द्वारा अपमानित होकर घायल किये जाने पर राजा युधिष्ठिर पुनः क्रोध से उसी प्रकार जल उठे, जैसे घी की आहुति से प्रज्वलित अग्नि।   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  8.49.16 
सोऽवज्ञाय तु निर्विद्ध: सूतपुत्रेण मारिष।
प्रजज्वाल तत: क्रोधाद्धविषेव हुताशन:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे महाराज! सारथीपुत्र के द्वारा अपमानित होकर घायल किये जाने पर राजा युधिष्ठिर पुनः क्रोध से उसी प्रकार जल उठे, जैसे घी की आहुति से प्रज्वलित अग्नि।
 
Honorable King! After being disrespectfully wounded by the son of a charioteer, King Yudhishthira again burned with anger like the fire ignited by the offering of ghee. 16.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)