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mahabharat 8.49.14: महाराज! ऐसा कहकर पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर ने लोहे के बने हुए तथा सुवर्ण पंख वाले दस बाणों से कर्ण को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  8.49.14 
एवमुक्त्वा महाराज कर्णं पाण्डुसुतस्तदा।
सुवर्णपुङ्खैर्दशभिर्विव्याधायस्मयै: शरै:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! ऐसा कहकर पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर ने लोहे के बने हुए तथा सुवर्ण पंख वाले दस बाणों से कर्ण को घायल कर दिया।
 
Maharaj! Saying this, Pandu's son Yudhishthir pierced Karna with ten arrows made of iron and having golden feathers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)