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mahabharat 8.49.10: उस समय क्रोध से लाल आँखें किए हुए युधिष्ठिर पास ही रुके हुए शत्रुवीरों का संहार करने वाले कर्ण से बोले-॥10॥   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  8.49.10 
ततो युधिष्ठिर: कर्णमदूरस्थं निवारितम्।
अब्रवीत् परवीरघ्नं क्रोधसंरक्तलोचन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उस समय क्रोध से लाल आँखें किए हुए युधिष्ठिर पास ही रुके हुए शत्रुवीरों का संहार करने वाले कर्ण से बोले-॥10॥
 
At that time Yudhishthira, his eyes turning red with anger, spoke to Karna, the slayer of enemy warriors, who was stopped nearby -॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)