Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.48.d1: सात्यकि ने वृषसेन को लोहे के सात बाणों से घायल कर दिया और फिर सत्तर बाणों से उसे बुरी तरह घायल कर दिया। उसने उसके सारथि को भी तीन बाणों से घायल कर दिया। | mahabharat अध्याय 8.48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(सात्यकिर्वृषसेनं तु विद्ध्वा सप्तभिरायसै:।
पुनर्विव्याध सप्तत्या सारथिं च त्रिभि: शरै:॥
अनुवाद
सात्यकि ने वृषसेन को लोहे के सात बाणों से घायल कर दिया और फिर सत्तर बाणों से उसे बुरी तरह घायल कर दिया। उसने उसके सारथि को भी तीन बाणों से घायल कर दिया।
Satyaki injured Vrishasena with seven arrows made of iron and then wounded him deeply with seventy arrows. He also pierced his charioteer with three arrows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥