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mahabharat 8.48.7: पृथ्वी अपने पर्वतों, वृक्षों और महासागरों सहित, आकाश अपनी वायु और बादलों सहित, तथा स्वर्ग अपने सूर्य, चन्द्रमा, ग्रहों और तारों सहित स्पष्ट रूप से घूमते हुए प्रतीत हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.48.7 
साद्रिद्रुमार्णवा भूमि: सवाताम्बुदमम्बरम्।
सार्केन्दुग्रहनक्षत्रा द्यौश्च व्यक्तं विघूर्णिता॥ ७॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी अपने पर्वतों, वृक्षों और महासागरों सहित, आकाश अपनी वायु और बादलों सहित, तथा स्वर्ग अपने सूर्य, चन्द्रमा, ग्रहों और तारों सहित स्पष्ट रूप से घूमते हुए प्रतीत हो रहे थे।
 
The earth with its mountains, trees and oceans, the sky with its wind and clouds, and the heaven with its sun, moon, planets and stars, appeared to be clearly rotating. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)