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mahabharat 8.48.66: हे प्रजानाथ! उस समय नाना प्रकार के युद्ध-वायद्रव्यों की ध्वनि गूँजने लगी और सब ओर से वीर योद्धाओं की गर्जना सुनाई देने लगी।   |   mahabharat अध्याय 8.48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  8.48.66 
नानावादित्रघोषाश्च प्रादुरासन् विशाम्पते।
सिंहनादश्च संजज्ञे शूराणामभिगर्जताम्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! उस समय नाना प्रकार के युद्ध-वायद्रव्यों की ध्वनि गूँजने लगी और सब ओर से वीर योद्धाओं की गर्जना सुनाई देने लगी।
 
O Prajanath! At that time the sounds of various kinds of battle instruments started resounding and the roars of the valiant warriors could be heard from all sides. 66.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)