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mahabharat 8.48.59: आकाश, पृथ्वी और समस्त दिशाएँ तीक्ष्ण बाणों से भरी हुई थीं। उस क्षेत्र में आकाश लालिमायुक्त बादलों से आच्छादित प्रतीत हो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 8.48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  8.48.59 
द्यौर्वियद्भूर्दिशश्चैव प्रपूर्णा निशितै: शरै:।
अरुणाभ्रावृताकारं तस्मिन् देशे बभौ वियत्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
आकाश, पृथ्वी और समस्त दिशाएँ तीक्ष्ण बाणों से भरी हुई थीं। उस क्षेत्र में आकाश लालिमायुक्त बादलों से आच्छादित प्रतीत हो रहा था।
 
The heavens, the sky, the earth and all directions were filled with sharp arrows. In that region the sky appeared to be covered with clouds of the reddish hue.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)