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mahabharat 8.48.58: किसी ने नहीं देखा कि वह कब तरकश से तीर निकालता, कब धनुष पर चढ़ाता और कब गुस्से से दुश्मनों पर चलाता। सब बस दुश्मनों को मरते हुए देखते रहते। 58   |   mahabharat अध्याय 8.48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  8.48.58 
न ह्याददानं ददृशु: संदधानं च सायकान्।
विमुञ्चन्तं च संरम्भादपश्यन्त हतानरीन्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
किसी ने नहीं देखा कि वह कब तरकश से तीर निकालता, कब धनुष पर चढ़ाता और कब गुस्से से दुश्मनों पर चलाता। सब बस दुश्मनों को मरते हुए देखते रहते। 58
 
No one saw when he would take out an arrow from the quiver, when he would place it on the bow and when he would angrily shoot it at the enemies. Everyone would just watch the enemies getting killed. 58
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)