श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण  »  श्लोक 52-54
 
 
श्लोक  8.48.52-54 
धृष्टद्युम्नस्तत: कर्णमविध्यद् दशभि: शरै:॥ ५२॥
द्रौपदेयास्त्रिसप्तत्या युयुधानस्तु सप्तभि:।
भीमसेनश्चतु:षष्ट्या सहदेवश्च सप्तभि:॥ ५३॥
नकुलस्त्रिंशता बाणै: शतानीकस्तु सप्तभि:।
शिखण्डी दशभिर्वीरो धर्मराज: शतेन तु॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर धृष्टद्युम्न ने दस बाणों से कर्ण को घायल कर दिया। तब द्रौपदी के पुत्रों ने कर्ण को तिहत्तर बाणों से, सात्यकि ने सात, भीमसेन ने चौंसठ, सहदेव ने सात, नकुल ने तीस, शतानीक ने सात, शिखंडी ने दस और वीर धर्मराज युधिष्ठिर ने सौ बाणों से कर्ण को घायल कर दिया। 52-54॥
 
Thereafter Dhrishtadyumna pierced Karna with ten arrows. Then Draupadi's sons shot Karna with seventy-three arrows, Satyaki's seven, Bhimasena's sixty-four, Sahadev's seven, Nakul's thirty, Satanika's seven, Shikhandi's ten and the brave Dharmaraja Yudhishthir shot Karna with a hundred arrows. 52-54॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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