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mahabharat 8.48.51-52h: अनुष्ठान से सुसज्जित दूसरे रथ पर बैठकर दु:शासन पुनः पांडवों से युद्ध करने लगा, जिससे कर्ण का बल बढ़ गया।   |   mahabharat अध्याय 8.48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  8.48.51-52h 
स त्वन्यं रथमास्थाय विधिवत् कल्पितं पुन:॥ ५१॥
युयुधे पाण्डुभि: सार्धं कर्णस्याप्याययन् बलम्।
 
 
अनुवाद
अनुष्ठान से सुसज्जित दूसरे रथ पर बैठकर दु:शासन पुनः पांडवों से युद्ध करने लगा, जिससे कर्ण का बल बढ़ गया।
 
Sitting on another chariot decorated with rituals, Dushasan once again started fighting with the Pandavas, increasing the strength of Karna. 51 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)