श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  8.48.5 
तत: शङ्खसहस्राणां नि:स्वनो हृदयङ्गम:।
प्रादुरासीदुभयतो भेरीशब्दश्च दारुण:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् दोनों सेनाओं में सहसा सहस्रों शंखों की ध्वनि उत्पन्न हुई, जिससे हृदय काँप उठा। इसके साथ ही भयंकर तुरही की ध्वनि भी होने लगी ॥5॥
 
Thereafter the sound of thousands of conches suddenly arose in both the armies, which shook the heart. Along with this, a terrifying trumpet sound also started. ॥5॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd