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mahabharat 8.48.45-46h: तब दु:शासन ने वृषसेन को रथ और शस्त्रों से वंचित देखकर यह मान लिया कि वह युद्ध में दुःखी हो गया है और उसे तुरंत ही अपने रथ पर बैठाकर वहाँ से हटा दिया॥45 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  8.48.45-46h 
दु:शासनस्तु तं दृष्ट्वा विरथं व्यायुधं कृतम्॥ ४५॥
आरोप्य स्वरथं तूर्णमपोवाह रणातुरम्।
 
 
अनुवाद
तब दु:शासन ने वृषसेन को रथ और शस्त्रों से वंचित देखकर यह मान लिया कि वह युद्ध में दुःखी हो गया है और उसे तुरंत ही अपने रथ पर बैठाकर वहाँ से हटा दिया॥45 1/2॥
 
Then Dushasan, seeing Vrishasena deprived of his chariot and weapons, assumed that he was distressed in the battle and immediately seated him in his chariot and removed him from there. ॥ 45 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)