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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण  »  श्लोक 41-42
 
 
श्लोक  8.48.41-42 
सात्यकिर्वृषसेनस्य सूतं हत्वा त्रिभि: शरै:॥ ४१॥
धनुश्चिच्छेद भल्लेन जघानाश्वांश्च सप्तभि:।
ध्वजमेकेषुणोन्मथ्य त्रिभिस्तं हृद्यताडयत्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
उनमें से तीन बाणों से सात्यकि ने वृषसेन के सारथि को मार डाला, एक बाण से उसका धनुष काट डाला, सात बाणों से उसके घोड़ों को मार डाला, फिर एक बाण से उसका ध्वज तोड़ दिया और तीन बाणों से वृषसेन की छाती में घाव कर दिया।
 
With three of those arrows Satyaki killed Vrishasena's charioteer and with one he cut off his bow. With seven arrows he killed his horses. Then with one arrow he broke his flag and with three arrows he wounded Vrishasena in the chest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)