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mahabharat 8.48.39-40h: तब क्रोध से अचेत हुए सुषेण ने दूसरा धनुष लेकर नकुल को साठ बाणों से तथा सहदेव को सात बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  8.48.39-40h 
अथान्यद् धनुरादाय सुषेण: क्रोधमूर्च्छित:॥ ३९॥
आविध्यन्नकुलं षष्ट्या सहदेवं च सप्तभि:।
 
 
अनुवाद
तब क्रोध से अचेत हुए सुषेण ने दूसरा धनुष लेकर नकुल को साठ बाणों से तथा सहदेव को सात बाणों से घायल कर दिया।
 
Then Sushen, unconscious with anger, took another bow and wounded Nakula with sixty arrows and Sahadeva with seven arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)