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mahabharat 8.48.37: तब क्रोध से अचेत हुए नकुल ने दूसरा धनुष उठाया और सुषेण पर नौ बाण चलाकर उसे युद्धभूमि में आगे बढ़ने से रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  8.48.37 
अथान्यद् धनुरादाय नकुल: क्रोधमूर्च्छित:।
सुषेणं नवभिर्बाणैर्वारयामास संयुगे॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
तब क्रोध से अचेत हुए नकुल ने दूसरा धनुष उठाया और सुषेण पर नौ बाण चलाकर उसे युद्धभूमि में आगे बढ़ने से रोक दिया।
 
Then Nakula, unconscious with anger, took up another bow and shot nine arrows at Sushen, preventing him from advancing on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)