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mahabharat 8.48.35: नकुल ने भी भारी भार वहन करने में समर्थ बीस प्रबल बाणों से सुषेण को घायल कर दिया और बड़े जोर से गर्जना की, जिससे कर्ण के मन में भय उत्पन्न हो गया।   |   mahabharat अध्याय 8.48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  8.48.35 
नकुलस्तं तु विंशत्या विद्‍ध्वा भारसहैर्दृढै:।
ननाद बलवन्नादं कर्णस्य भयमादधत्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
नकुल ने भी भारी भार वहन करने में समर्थ बीस प्रबल बाणों से सुषेण को घायल कर दिया और बड़े जोर से गर्जना की, जिससे कर्ण के मन में भय उत्पन्न हो गया।
 
Nakula also wounded Sushen with twenty strong arrows capable of bearing heavy loads and roared loudly, instilling fear in the mind of Karna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)