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mahabharat 8.48.33: तब अपने पुत्र के प्राण बचाने की इच्छा से कर्ण ने क्रूर भीमसेन को मारने की इच्छा से उन पर तिहत्तर बाणों से आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 8.48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  8.48.33 
पुन: कर्णस्त्रिसप्तत्या भीमसेनमथेषुभि:।
पुत्रं परीप्सन् विव्याध क्रूरं क्रूरैर्जिघांसया॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तब अपने पुत्र के प्राण बचाने की इच्छा से कर्ण ने क्रूर भीमसेन को मारने की इच्छा से उन पर तिहत्तर बाणों से आक्रमण किया।
 
Then, wishing to save his son's life, Karna, with the desire to kill the cruel Bhimasena, attacked him with seventy-three arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)