Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.48.27: इतना ही नहीं, अपितु अपने हितैषी मित्रों के देखते ही देखते उसने कर्ण के पुत्र भानुसेन को दस बाणों से उसके घोड़े, सारथि, अस्त्र-शस्त्र तथा ध्वजाओं सहित मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 8.48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  8.48.27 
भानुसेनं च दशभि: साश्वसूतायुधध्वजम्।
पश्यतां सुहृदां मध्ये कर्णपुत्रमपातयत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, अपितु अपने हितैषी मित्रों के देखते ही देखते उसने कर्ण के पुत्र भानुसेन को दस बाणों से उसके घोड़े, सारथि, अस्त्र-शस्त्र तथा ध्वजाओं सहित मार डाला।
 
Not only this, but in front of the eyes of his well-wishing friends, he killed Karna's son Bhanusena with ten arrows along with his horse, charioteer, weapons and flags.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)