| श्री महाभारत » पर्व 8: कर्ण पर्व » अध्याय 48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण » श्लोक 20-21 |
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| | | | श्लोक 8.48.20-21  | धृष्टद्युम्न: सात्यकिश्च द्रौपदेया वृकोदर:।
जनमेजय: शिखण्डी च प्रवीराश्च प्रभद्रका:॥ २०॥
चेदिकेकयपाञ्चाला यमौ मत्स्याश्च दंशिता:।
समभ्यधावन् राधेयं जिघांसन्त: प्रहारिणम्॥ २१॥ | | | | | | अनुवाद | | उस समय आक्रमण करने वाले राधापुत्र कर्ण को मारने की इच्छा से धृष्टद्युम्न, सात्यकि, द्रौपदी के पाँचों पुत्र, भीमसेन, जनमेजय, शिखण्डी, प्रधान प्रभद्रक वीर, चेदि, केकय तथा पांचाल देश के योद्धा, नकुल-सहदेव तथा कवच से सुसज्जित मत्स्य देश के सैनिक उस पर टूट पड़े ॥20-21॥ | | | | At that time, with the desire to kill Karna, the son of Radha, who had attacked, Dhrishtadyumna, Satyaki, Draupadi's five sons, Bhimsen, Janamejaya, Shikhandi, the chief Prabhadrak Veer, Chedi, Kekay and the warriors of Panchal country, Nakul-Sahadeva and Matsya country soldiers equipped with armor attacked him. 20-21॥ | | ✨ ai-generated | | |
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