Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.48.18: माननीय राजा! कर्ण के दो अजेय पुत्र सुषेण और चित्रसेन उसके पहियों की रक्षा के लिए तत्पर थे और अपने प्राणों की परवाह किए बिना युद्ध कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  8.48.18 
चक्ररक्षौ तु कर्णस्य पुत्रौ मारिष दुर्जयौ।
सुषेण: सत्यसेनश्च त्यक्त्वा प्राणानयुध्यताम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
माननीय राजा! कर्ण के दो अजेय पुत्र सुषेण और चित्रसेन उसके पहियों की रक्षा के लिए तत्पर थे और अपने प्राणों की परवाह किए बिना युद्ध कर रहे थे।
 
Honorable King! Karna's two invincible sons Sushen and Chitrasena were ready to protect his wheels and fought without any attachment to their lives.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)