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mahabharat 8.48.11: तत्पश्चात् रथियों में श्रेष्ठ कर्ण ने सुन्दर पंख वाले पच्चीस तीक्ष्ण बाणों द्वारा पच्चीस पांचालों को मृत्यु के मुख में भेज दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 48: कर्णके द्वारा बहुत-से योद्धाओंसहित पाण्डव-सेनाका संहार, भीमसेनके द्वारा कर्णपुत्र भानुसेनका वध, नकुल और सात्यकिके साथ वृषसेनका युद्ध तथा कर्णका राजा युधिष्ठिरपर आक्रमण  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  8.48.11 
तत: सुपुङ्खैर्निशितै रथश्रेष्ठो रथेषुभि:।
अवधीत् पञ्चविंशत्या पञ्चालान् पञ्चविंशतिम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् रथियों में श्रेष्ठ कर्ण ने सुन्दर पंख वाले पच्चीस तीक्ष्ण बाणों द्वारा पच्चीस पांचालों को मृत्यु के मुख में भेज दिया।
 
Thereafter Karna, the best among charioteers, sent twenty-five Panchalas to the jaws of death with twenty-five sharp arrows having beautiful feathers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)