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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 47: कौरवों और पाण्डवोंकी सेनाओंका भयंकर युद्ध तथा अर्जुन और कर्णका पराक्रम  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  8.47.3 
संजय उवाच
तदास्थितमवज्ञाय प्रत्यमित्रबलं महत्।
अव्यूहतार्जुनो व्यूहं पुत्रस्य तव दुर्नये॥ ३॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा - महाराज! यह जानकर कि आपके पुत्र की कुनीति के कारण युद्ध में विशाल शत्रु सेना उपस्थित है, अर्जुन ने भी अपनी सेना की व्यूह रचना की।
 
Sanjaya said - Maharaj! Knowing that due to your son's bad policy, a huge enemy army was present in the war, Arjuna also formed the formation of his army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)