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श्लोक 8.47.10-11h  |
स सम्प्रहारस्तुमुलस्तेषामासीत् किरीटिना॥ १०॥
तस्यैव न: श्रुतो यादृङ्निवातकवचै: सह। |
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| अनुवाद |
| किरीटधारी अर्जुन के साथ संशप्तकों का वह युद्ध निवातकवच नामक राक्षसों के साथ हुए अर्जुन के युद्ध के समान भयंकर था, जिसे हम सुन चुके हैं।॥10 1/2॥ |
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| That battle of the Samshaptakas with crown-wearing Arjuna was as terrible as the battle of Arjuna with the demons named Nivatakavacha, which we have heard about.॥10 1/2॥ |
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