श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक d7
 
 
श्लोक  8.46.d7 
संजय उवाच
इत्युक्त्वा विविधा वाच: कुरव: कुरुनन्दन।
आजघ्नु: पटहांश्चैव तूर्यांश्चैव सहस्रश:॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे कुरुपुत्र! यह सब कहकर कौरवों ने सहस्रों नगाड़े बजाए तथा अन्य वाद्य भी बजवाए।
 
Sanjaya says - O son of Kuru! After saying all these things, the Kauravas beat thousands of drums and also got other musical instruments played.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)