श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक d10-d11
 
 
श्लोक  8.46.d10-d11 
तेषां पदाता नागानां पादरक्षा: समन्तत:।
पट्टिशासिधरा: शूराश्चापबाणभुशुण्डिन:॥
भिन्दिपालधराश्चैव शूलहस्ता: सुचक्रिण:।
तेषां समागमो घोरो देवासुररणोपम:॥ )
 
 
अनुवाद
वीर पैदल सैनिक हाथ में मेखला, तलवार, धनुष-बाण, भुशुण्डि, भिन्दिपाल, त्रिशूल और चक्र लेकर हाथियों के पैरों की चारों ओर से रक्षा कर रहे थे। उनके बीच देवताओं और दानवों के बीच होने वाले युद्ध के समान भयंकर युद्ध छिड़ गया।
 
The valiant infantrymen were protecting the feet of the elephants from all sides with belts, swords, bows and arrows, Bhushundi, Bhindipal, trident and chakra in their hands. A fierce battle like the war between gods and demons broke out between them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)