इति संवदतोरेव तयो: पुरुषसिंहयो:।
ते सेने समसज्जेतां गङ्गायमुनवद् भृशम्॥ ८७॥
अनुवाद
महाराज! जब दोनों सिंह-पुरुष शल्य और कर्ण इस प्रकार बातें कर रहे थे, उसी समय कौरवों और पाण्डवों की सेनाएँ गंगा और यमुना के समान वेग से एक-दूसरे से जा मिलीं।
King! While the two lion-men Shalya and Karna were talking like this, the armies of the Kauravas and the Pandavas joined each other as swiftly as the Ganges and the Yamuna.
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि कर्णशल्यसंवादे षट्चत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें कर्ण और शल्यका संवादविषयक छियालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४६॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १६ श्लोक मिलाकर कुल १०३ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥