vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 8: कर्ण पर्व
»
अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा
»
श्लोक 84
श्लोक
8.46.84
अमी स्थिता द्रौपदेया: पञ्च पञ्चाचला इव।
व्यवस्थिता योद्धुकामा: सर्वेऽर्जुनसमा युधि॥ ८४॥
अनुवाद
ये द्रौपदी के पाँचों पुत्र पाँच पर्वतों के समान अडिग होकर युद्ध के लिए खड़े हैं। ये सब के सब युद्धस्थल में अर्जुन के समान पराक्रमी हैं। 84॥
These five sons of Draupadi are standing for the war as steadfast as five mountains. All of them are as mighty as Arjuna in the battlefield. 84॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×