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mahabharat 8.46.82: शत्रुओं के नगर को जीतने वाले, धर्मात्माओं में श्रेष्ठ, धर्मराज युधिष्ठिर भी युद्धभूमि में खड़े हैं। शत्रुओं के लिए उन्हें पराजित करना सरल नहीं है ॥ 82॥   |   mahabharat अध्याय 8.46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  8.46.82 
एष धर्मभृतां श्रेष्ठो धर्मराजो युधिष्ठिर:।
तिष्ठत्यसुकर: संख्ये परै: परपुरञ्जय:॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं के नगर को जीतने वाले, धर्मात्माओं में श्रेष्ठ, धर्मराज युधिष्ठिर भी युद्धभूमि में खड़े हैं। शत्रुओं के लिए उन्हें पराजित करना सरल नहीं है ॥ 82॥
 
The conqueror of the enemy's city, the best of the righteous, Dharmaraja Yudhishthira, is also standing on the battlefield. It is not easy for the enemies to defeat him. ॥ 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)