श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  8.46.80 
पश्य कुन्तीसुतं वीरं भीममक्लिष्टकारिणम्।
प्रभासन्तं महाबाहुं स्थितं मेरुमिवापरम्॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
यहाँ देखो, वह भयंकर वीर, बलवान और पराक्रमी कुन्तीपुत्र अर्जुन, जो सहज ही महान् कर्म कर रहा है, दूसरे मेरु पर्वत के समान स्थिर खड़ा हुआ, चमक रहा है।
 
Look here, the fierce hero, the powerful and powerful son of Kunti, Arjun, who is effortlessly performing great deeds, is shining brightly, standing as steady as another Mount Meru.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)