Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.46.77: इस प्रकार मैं युद्ध में अर्जुन के चरित्र को समझता हूँ। अर्जुन को युद्धस्थल में इन्द्र सहित समस्त देवता तथा राक्षस भी नहीं हरा सकते ॥77॥   |   mahabharat अध्याय 8.46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  8.46.77 
ईदृग्रूपमहं मन्ये पार्थस्य युधि विग्रहम्।
न हि शक्योऽर्जुनो जेतुं युधि सेन्द्रै: सुरासुरै:॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैं युद्ध में अर्जुन के चरित्र को समझता हूँ। अर्जुन को युद्धस्थल में इन्द्र सहित समस्त देवता तथा राक्षस भी नहीं हरा सकते ॥77॥
 
This is how I understand Arjuna's character in the war. Arjuna cannot be defeated on the battlefield even by all the gods including Indra and by the demons. ॥ 77॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)