श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.46.7 
प्रविभज्य यथान्यायं कथं वा समवस्थिता:।
कथं पाण्डुसुताश्चापि प्रत्यव्यूहन्त मामकान्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वे किस प्रकार खड़े होकर योद्धाओं को उचित रीति से विभाजित कर रहे थे? पांडवों ने मेरे पुत्रों के विरुद्ध किस प्रकार व्यूह रचना की?
 
How did they stand, dividing the warriors in an appropriate manner? How did the Pandavas form an array against my sons?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)