vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 8: कर्ण पर्व
»
अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा
»
श्लोक 7
श्लोक
8.46.7
प्रविभज्य यथान्यायं कथं वा समवस्थिता:।
कथं पाण्डुसुताश्चापि प्रत्यव्यूहन्त मामकान्॥ ७॥
अनुवाद
वे किस प्रकार खड़े होकर योद्धाओं को उचित रीति से विभाजित कर रहे थे? पांडवों ने मेरे पुत्रों के विरुद्ध किस प्रकार व्यूह रचना की?
How did they stand, dividing the warriors in an appropriate manner? How did the Pandavas form an array against my sons?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×