श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  8.46.61 
एतत् कूजति गाण्डीवं विकृष्टं सव्यसाचिना।
एते हस्तवता मुक्ता घ्नन्त्यमित्राञ्शिता: शरा:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
सव्यसाची अर्जुन का गाण्डीव धनुष टंकारने लगा है। उसके कुशल हाथों से छूटे ये तीखे बाण शत्रुओं के प्राण हर रहे हैं।
 
‘The Gandiva bow drawn by Savyasachi Arjuna has started twirling. These sharp arrows shot by his skilful hands are taking the lives of the enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)