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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा
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श्लोक 59
श्लोक
8.46.59
एतच्चक्रं गदा शार्ङ्गं शङ्ख: कृष्णस्य धीमत:।
अत्यर्थं भ्राजते कृष्णे कौस्तुभस्तु मणिस्तत:॥ ५९॥
अनुवाद
इन बुद्धिमान श्रीकृष्ण के शंख, चक्र, गदा, सींग और धनुष अत्यंत सुन्दर हैं। इनके वक्षस्थल पर कौस्तुभमणि सर्वाधिक चमक रही है। 59॥
The conch, disc, mace, horn and bow of this intelligent Shri Krishna are very beautiful. Kaustubhamani is shining the most on his chest. 59॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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