श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  8.46.55-56h 
ध्वजा: कणकणायन्ते वातेनाभिसमीरिता:॥ ५५॥
विभ्राजन्ति रथे कर्ण विमाने दैवते यथा।
 
 
अनुवाद
कर्ण! देवताओं के विमान के समान इस रथ पर लगे हुए ये ध्वज वायु के झोंकों से टकराकर कर्कश ध्वनि करते हुए शोभा पा रहे हैं।
 
Karna! These flags on this chariot, which is like the aircraft of the gods, are looking beautiful by making a crackling sound as they are hit by the gusts of wind. 55 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)