श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  8.46.51-52h 
शङ्खानां तुमुल: शब्द: श्रूयते लोमहर्षण:॥ ५१॥
आनकानां च राधेय मृदङ्गानां च सर्वश:।
 
 
अनुवाद
हे राधानन्दन! शंख, ढोल और मृदंग की रोमांचकारी कोलाहलपूर्ण ध्वनि चारों ओर से सुनाई दे रही है।
 
Radhanandan! The thrilling tumultuous sound of conches, drums and mridangas can be heard from all sides. 51 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)