Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.46.5-6: धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! जो देवताओं के लिए भी अजेय थे और भीमसेन द्वारा रक्षित थे, उन धृष्टद्युम्न आदि महाधनुर्धरों के प्रत्युत्तर में पाण्डव योद्धाओं के समान राधापुत्र कर्ण ने किस प्रकार व्यूह रचना की? संजय! मेरी सेना के दोनों ओर तथा विपरीत दिशा के योद्धा कौन थे?॥ 5-6॥ | mahabharat अध्याय 8.46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृतराष्ट्र उवाच
कथं संजय राधेय: प्रत्यव्यूहत पाण्डवान्।
धृष्टद्युम्नमुखान् सर्वान् भीमसेनाभिरक्षितान्॥ ५॥
सर्वानेव महेष्वासानजय्यानमरैरपि।
के च प्रपक्षौ पक्षौ वा मम सैन्यस्य संजय॥ ६॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! जो देवताओं के लिए भी अजेय थे और भीमसेन द्वारा रक्षित थे, उन धृष्टद्युम्न आदि महाधनुर्धरों के प्रत्युत्तर में पाण्डव योद्धाओं के समान राधापुत्र कर्ण ने किस प्रकार व्यूह रचना की? संजय! मेरी सेना के दोनों ओर तथा विपरीत दिशा के योद्धा कौन थे?॥ 5-6॥
Dhritarashtra asked - Sanjaya! How did Radha's son Karna form the formation in response to all the great archers like Dhrishtadyumna, who were invincible even for the gods and protected by Bhimasena, like the Pandava warriors? Sanjaya! Who were the warriors on both sides and the opposite side of my army?॥ 5-6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥