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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  8.46.47-48h 
पश्य कङ्कांश्च गृध्रांश्च समवेतान् सहस्रश:॥ ४७॥
स्थितानभिमुखान् घोरानन्योन्यमभिभाषत:।
 
 
अनुवाद
देखो! हजारों भयंकर कौवे और गिद्ध इकट्ठे होकर हमारे सामने खड़े हैं और आपस में बातें कर रहे हैं।
 
‘Look! Thousands of fierce crows and vultures have gathered together and are standing in front of us and are talking amongst themselves.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)