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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा
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श्लोक 44-45h
श्लोक
8.46.44-45h
प्रवात्येष महावायुरभितस्तव वाहिनीम्॥ ४४॥
क्रव्यादा व्याहरन्त्येते मृगा: क्रन्दन्ति भैरवम्।
अनुवाद
‘आपकी सेना के चारों ओर यह भयंकर वायु बह रही है, मांसभक्षी पशु-पक्षी चिल्ला रहे हैं और मृग भयंकर रूप से विलाप कर रहे हैं।॥44 1/2॥
‘This fierce wind is blowing all around your army, the carnivorous animals and birds are calling and the deer are wailing horribly.॥ 44 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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