श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  8.46.31 
तदेतद् वै समालोक्य प्रत्यमित्रं महद् बलम्।
यथा नाभिभवत्यस्मांस्तथा नीतिर्विधीयताम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
अतः इस विशाल शत्रु सेना को देखकर आप ऐसी नीति बनाइये जिससे वे हमें परास्त न कर सकें।’ ॥31॥
 
Therefore, looking at this huge enemy army, you should formulate such a policy that they cannot defeat us.' ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)