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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  8.46.27 
बार्हस्पत्य: सुविहितो नायकेन विपश्चिता।
नृत्यतीव महाव्यूह: परेषां भयमादधत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
बृहस्पति द्वारा बताई गई विधि के अनुसार विद्वान सेनापति कर्ण द्वारा कुशलतापूर्वक रची गई वह महान सेना शत्रुओं के हृदय में भय उत्पन्न करती हुई नृत्य के समान नाच रही थी।
 
That great formation, skillfully designed by the learned general Karna as per the method prescribed by Brihaspati, was dancing like a dance, creating fear in the hearts of the enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)