Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.46.20-22h: महाराज! राजा दुर्योधन अपने भाइयों द्वारा, जो विचित्र आयुध और कवच धारण किए हुए थे, तथा मद्र और केकय देशों के महारथी योद्धाओं द्वारा, जो वहाँ एकत्र हुए थे, सुरक्षित होकर दु:शासन के पीछे-पीछे चल रहा था। महाराज! उस समय वह देवताओं से घिरा हुआ देवराज इन्द्र के समान शोभा पा रहा था। | mahabharat अध्याय 8.46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तमन्वयान्महाराज स्वयं दुर्योधनो नृप:॥ २०॥
चित्रास्त्रैश्चित्रसंनाहै: सोदर्यैरभिरक्षित:।
रक्ष्यमाणो महावीर्यै: सहितैर्मद्रकेकयै:॥ २१॥
अशोभत महाराज देवैरिव शतक्रतु:।
अनुवाद
महाराज! राजा दुर्योधन अपने भाइयों द्वारा, जो विचित्र आयुध और कवच धारण किए हुए थे, तथा मद्र और केकय देशों के महारथी योद्धाओं द्वारा, जो वहाँ एकत्र हुए थे, सुरक्षित होकर दु:शासन के पीछे-पीछे चल रहा था। महाराज! उस समय वह देवताओं से घिरा हुआ देवराज इन्द्र के समान शोभा पा रहा था।
Maharaj! King Duryodhana was following Dushasan, protected by his brothers who were wearing strange weapons and armor and by the mighty warriors of Madra and Kekaya countries who had come together. Maharaj! At that time he looked like Devraja Indra surrounded by the gods. 20-21 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥